अवैध धन को वैध बनाने की रोकथाम
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पर्यवलोकन (पी एम एल ए)
धन शोधन का परिहार अधिनियम, (पी एम एल ए) 2002 जनवरी, 2003 में अधिनियमित किया गया था । अधिनियम, उस के तहत नियमों सहित, 1 जुलाई, 2005 से प्रवृत हुआ था । पी एम एल ए की धारा 3 धन शोधन के अपराध की परिभाषा इस प्रकार करती है कि कोई भी व्यक्ति, जो प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से यह कार्य करने का प्रयास करता है अथवा जान-बूझ कर एसे व्यक्ति की सहायता करता है अथवा जानबूझ कर ऐसी – एक पार्टी है अथवा वास्तव में अपराध की कार्यवाही के किसी गतिविधि में संलग्न है और उसे एक बेदाग संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करता है, धन शोधन के अपराध का दोषी माना जाएगा । यह बैंकिग कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और मध्यस्थों के लिए उनके सभी ग्राहकों की पहचान और सभी सौदों के रिकार्डो के सत्यापन और अनुरक्षण तथा वित्तीय आसूचना यूनिट इंडिया (एफ आई यू – आई एन डी) को निर्धारित फार्म में ऐसे सौदों की सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्यता निर्धारित करता है । यह एफ आई यू – आई एन डी के निदेशक को बैंकिंग कंपनी, वित्तीय संस्थान अथवा माध्यस्थम पर अर्थ दण्ड लगाने का अधिकार प्रदान करता है यदि वे अथवा उन का कोई अधिकारी ऊपर बताए गए अनुसार अधिनियम के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहता है ।
पी एम एल ए ने प्रवर्तन निदेशालय के कुछ अधिकारियों को धन शोधन के अपराध वाले मामलेां में जांच – पड़ताल करने और धन शोधन में शामिल संपत्ति की कुर्की करने के अधिकार भी प्रदान किए हैं । पी एम एल ए इस के द्वारा कुर्की की पुष्टि करने अथवा कुर्की की गई सम्पत्तियों की जप्ती के आदेश के लिए अनिवार्य रूप से प्रदत्त क्षेत्राधिकार, शक्ति और प्राधिकार लागू करने के लिए एक न्यायनिर्णयन प्राधिकरण की संकल्पना करता है । यह न्याय निर्णयन प्राधिकारी और निदेशक, एफ आई यू – आई एन डी जैसे प्राधिकारियों के आदेशों के विरूद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए अपीलीय प्राधिकरण के गठन की भी संकल्पना करता है ।
पी एम एल ए उस के तहत दंडनीय अपराधों की जांच करने और ऐसे अपराधों, जिन में आरोपी पर आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत समान जांच की जा सकती है, की जांच करने के लिए विशेष न्यायालय अथवा विशेष न्यायालयों के रूप में एक अथवा अधिक सत्र न्यायालयों की नियुक्ति की संकल्पना करता है । पी एम एल ए उस के उपबंधों को प्रवृत करने के लिए पी एम एल ए अथवा उस देश में प्रवृत तदनुरूपी कानून के तहत के तहत किसी अपराध को रोकने के लिए सूचना के अदान-प्रदान के लिए अथवा पी एम एल ए के तहत किसी अपराध से संबंधित मामलों की जांच के लिए केन्द्रीय सरकार को किसी दूसरे देश की सरकार के साथ करार निष्पन्न करने की अनुमति प्रदान करता है ।
2011 एनआईसी कॉपीराइट. सभी अधिकार सुरक्षित.





