अवैध धन को वैध बनाने की रोकथाम
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सांविधिक ढांचा
धन शोधन के अपराधों की जांच आयोजित करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा बड़ी संख्या में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में विशेष न्यायालय गठित किए गए हैं । अधिनियम के तहत धन शोधन से उदभूत किसी सम्पत्ति की जब्ती और बेदखली से संबंधित कार्यवाहियों को लागू करने के लिए निदेशक, न्याय निर्णयन प्राधिकरण और अपीलीय अधिकरण जैसे प्राधिकरण स्थापित किए गए है ।
इस अधिनियम के सीमा क्षेत्र को विस्तृत करने और वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक दूसरे के साथ सहयोग करने तथा धन शोधन के संकट को नियंत्रित करने के लिए देशों के बीच द्वपक्षीय करारों के लिए अधिनियम में व्यवस्था की गई है । ये करार या तो इस अधिनियम के उपबंधों को लागू करने के प्रयोजन हेतु अथवा सूचना के आदान-प्रदान किए जाएंगे जो इस अधिनियम अथवा उस विदेशी राज्य में पदनुरूपी कानूनों के तहत किसी अपाध के आरंभ होने से रोकने में सहायता करेगा ।
कुछ विशेष मामलों में केन्द्रीय सरकार ऐसी जांच की अवधि के दौरान संग्रहित किए गए जांच पड़ताल अथवा उन्हें अग्रेषित करने के लिए किसी संविदाकारी राज्य को/से सहायता मांग प्रमाणें की प्रदान कर सकती है ।
अधिनियम में आरोपी व्यक्तियों के संबंध में कार्रवाई/सहायता के लिए पास्परिक प्रबंधों की व्यवस्था की गई है ।
सरकार ने नवम्बर, 2004 में संयुक्त सचिव, भारत सरकार के रैंक में निदेशक की अध्यक्षता वाली वित्तीय आसूचना युनिट, भारत संस्थापित की है । संगठन ने कार्य करना आरंभ कर दिया है और पी एम एल ए की धारा – 12 की शर्तों में बैकिंग कंपनियों से नकद सौदों की रिपोर्ट और संदिग्ध सौदा रिपोर्टे प्राप्त करनी आरंभ कर दी है । संगठन में एफ आई यू के ‘एगमोट’ दल की सदस्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है जो कि विभिन्न देशों के एफ आई यू समूह का एक ‘अम्ब्रेलाग्रुप’ है ।
अधिनियम के तहत आरोपों के लिए जांच पड़ताल और अभियोजन की शक्तियां निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय को सौंपी गई हैं ।
इस के अतिरिक्त, अधिनियम की धारा के तहत न्याय निर्णयन प्राधिकरण और अधिनियम की धारा 25 के तहत अपीलीय अधिकरण भी स्थापित किया गया है और उस ने कार्य करना आरंभ कर दिया है ।
2011 एनआईसी कॉपीराइट. सभी अधिकार सुरक्षित.





