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अंतरराष्ट्रीय सहयोग

अप्रत्यक्ष कर

भारत 15 फ़रवरी, 1971 से वैश्विक सीमाशुल्क संगठन (डब्ल्यूसीओ) का सदस्य है तथा इसने निम्नलिखित डब्ल्यूसीओ कन्वेंशनों को स्वीकार किया है:

  • वैज्ञानिक उपकरणों के अस्थायी आयात पर सीमा शुल्क कन्वेंशन, 9 मार्च 1971।
  • शैक्षणिक सामग्री 4 दिसंबर 1973 के अस्थायी आयात पर सीमा शुल्क कन्वेंशन।
  • क्योटो कन्वेंशन- 1974, 18 अक्टूबर, 1976
  • नैनैरोबी कन्वेंशन - 9 जून, 1977
  • संगत प्रणाली सम्मेलन 23 जून 1996।
  • 20 जून 1988 - आदि प्रदर्शनियों, मेलों, बैठकों, पर प्रदर्शन या उपयोग के लिए वस्तुओं के आयात के लिए सुविधाएं विषय में सीमा शुल्क कन्वेंशन।
  • नैरोबी सम्मेलन 20 जून 1988।
  • अता कन्वेंशन 5 जुलाई 1989।
  • 30 दिसंबर 1994 - शुल्क मूल्यांकन पर समझौता।
  • जोहानिसबर्ग सम्मेलन 23 जून 2005.
  • संशोधित क्योटो कन्वेंशन - नवंबर 2005।

भारत यूरोपीय संघ, इजरायल, रूस, ब्रिटेन, हांगकांग, मालदीव, उज्बेकिस्तान, ईरान, मिस्र, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, सार्क देशों, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील के साथ सीमा शुल्क आपसी प्रशासनिक सहायता समझौते में प्रवेश किया है।

इन समझौतों के तहत सहयोग के दायरे मूल्य, वर्णन या संदिग्ध सामान, व्यक्तियों या परिवहन के साधन पर निगरानी बनाए रखने के माल के मोड़, दस्तावेजों की प्रामाणिकता के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के सामान की उत्पत्ति की झूठी घोषणाओं का पता लगाने में सक्षम जानकारी के आदान-प्रदान शामिल हैं।

नारकोटिक्स

अवैध नशीली दवाओं का व्यापार व्यापक रूप से एक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है। तस्कर, राष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करते हैं और प्रायः विभिन्न राष्ट्रीय व्यवस्थाओं में मुख्य खामियों तथा विषमताओं का पता लगाने का प्रयास करते हैं। अतः नीति निर्माताओं और प्रवर्तन अधिकारियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक के प्रयासों के लिए एक अनिवार्य तत्व है। नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों पर तीन संयुक्त राष्ट्र संघ की तीन कन्वेंशन हैं:

  • स्वापक औषधि पर एकल कन्वेंशन, 1961
  • मन: प्रभावी पदार्थ पर कन्वेंशन, 1971
  • स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन, 1988

इन कन्वेंशनों में नशीली दवाओं के प्रत्येक वर्ग पर अधिरोपित किए जाने वाले नियमों के निर्धारण के प्रकार, नियंत्रित किये जाने वाली नशीली दवाओं की सूची, नशीली पदार्थों के अपराधियों के लिए निर्धारित दंड / सजा के प्रकार का निर्धारण किया गया है। इन कन्वेंशनों में, सरकार तथा उनके प्राधिकारियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक क्रियाविधि भी स्थापित की गई है।

भारत, इन सभी कन्वेंशनों का एक हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र है तथा इसके अनुसार, 1985 में एनडीपीएस अधिनियम को अधिनियमित किया है जोकि इन कन्वेंशनों के तहत हमारे दायित्वों को पूरा करता है।

भारत नशीली दवाओं से संबंधित सभी अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे कि प्रोजेक्ट प्रिज्म तथा प्रोजेक्टड कोहेशन में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। क्षेत्रीय स्तर पर सार्क देशों ने, स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ के अवैध व्यापार के खिलाफ एक कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किया है।

भारत ने भी, नशीली दवाओं के नियंत्रण के क्षेत्र में सहयोग के लिए अन्य देशों के साथ कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

एंटी मनी लॉन्ड्रिंग

वित्तीय आसूचना एकक (एफआईयू- भारत) ने तीन देशों के साथ नामतः मॉरीशस, फिलीपींस और ब्राजील के साथ 30 जून, 2008 को द्विपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौता ज्ञापन का उद्देश्य, धन शोधन तथा आतंकवादी वितयन से संबंधित, संदिग्ध वित्तीय संव्यवहारों के बारे में सूचना एकत्रित करना, विकसित करनना, एकत्रित करने के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देते हुए सूचना के विनिमय को बढ़ावा देना है।