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वैधानिक फ्रेम वर्क

केंद्र सरकार द्वारा बहुत से राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में काले धन के अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई है। अधिनियम के तहत धन आशोधन से ली गई किसी संपत्ति की जब्ती तथा कुर्की से संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए प्राधिकारियों द्वारा निदेशक, न्यायनिर्णयन प्राधिकारी तथा अपीलीय न्यायालय की स्थापना की जा रही है।

इस अधिनियम के क्षेत्र के दायरे को बढ़ाने और वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, धन आशोधन के खतरे पर अंकुश लगाने तथा एक दूसरे के साथ सहयोग करने के लिए अधिनियम, देशों के बीच द्विपक्षीय समझौतों की व्यवस्था करता है। यह समझौतें या तो इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने या सूचना के विनिमय के लिए मददगार साबित होंगे जिससे, यह अधिनियम अपराध की रोकथाम में आयोग के या विदेशी राज्य में संबंधित कानून के लिए सहायक होगा।

कुछ मामलों में, केन्द्र सरकार संविदाकार देशों से / संविदाकार देशों को किसी भी जांच के लिए या इस प्रकार की जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों के अग्रेषण के लिए सहायता मांग करती है/ प्रदान कर सकती हैं।

अधिनियम, आरोपियों के संबंध में, प्रक्रियाओं / सहायता के लिए, पारस्परिक व्यवस्था का प्रावधान करता है।

सरकार ने, भारत सरकार के संयुक्त सचिव के पद के निदेशक की अध्यक्षता में, वित्तीय आसूचना इकाई, भारत की स्थापना की है। संगठन ने कार्य करना शुरू कर दिया है तथा पीएमएलए की धारा 12 के संबंध में, बैंकिंग कंपनियों से संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट तथा नकद संव्यवहारह रिपोर्ट प्राप्त करना शुरू कर दिया है। संगठन एफआईयूएस के एगमोंट ग्रुप जो कि विभिन्न देशों के एफआईयू का एक बचावकारी समूह है, की सदस्यता प्राप्त करने का प्रयास भी कर रहा है।

अधिनियम के तहत अपराधों की जांच और अभियोजन की शक्तियां निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय को सौंपी गई हैं।

इसके अलावा, अधिनियम की धारा 6 के संबंध में न्यायनिर्णयन प्राधिकारी तथा अधिनियम की धारा 25 के तहत अपीलीय न्यायालयों की स्थापना की गई है और यह कार्यात्मक बन गए हैं ।