एडवांस रूलिंगअथॉरिटी (एक्साइज़औरकस्टम्स)
भारतसरकार ने फाइनेंस एक्ट, 1998 और 1999 के ज़रिए एक्साइज़और कस्टम्स के लिए एडवांस रूलिंग अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसका मकसद विदेशी निवेशकों को उनके संभावित इन डायरेक्ट टैक्स दायित्व के बारे मेंपहले से भरोसा दिलानाथा, ताकि वे महत्वपूर्णमुद्दों पर बाध्यकारी रूलिंगपा सकें। एडवांस रूलिंग अथॉरिटी (कस्टम्स और सेंट्रल एक्साइज़) का गठन 7 मई, 2002 की नोटिफिकेशन नंबर 16/2002-Ad, IC के ज़रिए किया गया था।
इस अथॉरिटी में सुप्रीम कोर्टके एक रिटायर्ड जजचेयरपर्सन के तौर परकाम करते हैं औरदो सदस्य होते हैं - एकसदस्य इंडियन कस्टम्स एंड सेंट्रल एक्साइज़सर्विस का अधिकारी होताहै जो सीबीआईसी का सदस्य बननेके योग्य हो, और दूसराइंडियन लीगल सर्विस काअधिकारी होता है जोभारत सरकार में एडिशनल सेक्रेटरीहो या बनने केयोग्य हो।
एडवांसरूलिंग के लिए एप्लीकेशनये लोग दाखिल करसकते हैं:
कोईनॉन-रेसिडेंट जो भारत मेंकिसी नॉन-रेसिडेंट यारेसिडेंट के साथ मिलकरजॉइंट वेंचर शुरू कर रहाहो; या
कोईरेसिडेंट जो भारत मेंकिसी नॉन-रेसिडेंट केसाथ मिलकर जॉइंट वेंचर शुरू कर रहाहो; या
पूरीतरह से स्वामित्व वालीभारतीय सब्सिडियरी कंपनी, जिसकी होल्डिंग कंपनी एक विदेशी कंपनीहो
जो या जो भी, जैसा भी मामला हो, भारत में कोई बिज़नेसएक्टिविटी शुरू करने काप्रस्ताव रखता हो
भारतमें जॉइंट वेंचर; या
कोईरेसिडेंट जो ऐसे लोगोंकी किसी क्लास याकैटेगरी में आता हो, जिसे सेंट्रल गवर्नमेंट ऑफिशियल गैज़ेट में नोटिफिकेशन केज़रिए इस संबंध मेंबताए, और जो याजो भी, जैसा भीमामला हो, एडवांस रूलिंगके लिए एप्लीकेशन देताहो; सेंट्रल गवर्नमेंट ने 29 जुलाई, 2005 की नोटिफिकेशन नंबर 69/2005-Cus (N.T.) के ज़रिए CECA के तहत सिंगापुरसे इम्पोर्ट करने वाले इम्पोर्टर्सको नोटिफ़ाई किया है। जिनमामलों में 'एडवांस रूलिंग' (पहले से फैसला) मांगीजा सकती है, वेइस प्रकार हैं:
कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 और सेंट्रल एक्साइज़टैरिफ एक्ट, 1985 के तहत सामानका वर्गीकरण; और फाइनेंस एक्ट, 1994 (सर्विस टैक्स) के चैप्टर V केतहत किसी सर्विस को टैक्सेबल सर्विस के तौर परवर्गीकृत करना।
कस्टम्सएक्ट, 1962 और सेंट्रल एक्साइज़एक्ट, 1944 के तहत सामानकी कीमत तय करनेऔर फाइनेंस एक्ट, 1994 के चैप्टर V केतहत टैक्सेबल सर्विस की कीमत तयकरने के लिए अपनाएजाने वाले सिद्धांत।
सर्विसटैक्स लगाने के लिए टैक्सेबलसर्विस की कीमत तयकरना।
कस्टम्सएक्ट, 1962, कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975, सेंट्रल एक्साइज़ एक्ट, 1944 और सेंट्रल एक्साइज़टैरिफ एक्ट, 1985 के तहत जारीनोटिफिकेशन लागू होना, जिनकाअसर ड्यूटी की दर परपड़ता हो; साथ हीकिसी अन्य कानून केतहत लगने वाली ड्यूटी (जो कस्टम्स या एक्साइज़ ड्यूटीकी तरह ही लागूहो) और फाइनेंस एक्ट, 1994 के चैप्टर V के तहत जारीनोटिफिकेशन लागू होना (जैसाभी मामला हो)।
एक्साइज़ेबलसामान के निर्माण मेंया उससे जुड़े कामोंमें इस्तेमाल होने वाले सामानपर चुकाई गई (या मानीगई) एक्साइज़ ड्यूटी के क्रेडिट कीमंज़ूरी।
सर्विसटैक्स के क्रेडिट कीमंज़ूरी।
एक्साइज़ड्यूटी चुकाने की ज़िम्मेदारी तयकरना।
सर्विसटैक्स चुकाने की ज़िम्मेदारी तयकरना।
कस्टम्सटैरिफ एक्ट, 1975 के तहत नोटिफ़ाईकिए गए नियमों केआधार पर सामान केमूल स्थान (ओरिजिन) का पता लगानाऔर उससे जुड़े मामले।
कानूनके मुताबिक, एप्लीकेशन मिलने के 90 दिनों के भीतर एडवांसरूलिंग देना ज़रूरी है।एप्लीकेशन देने वाले कोयह छूट दी गईहै कि वह एप्लीकेशनकी तारीख से तीस दिनोंके भीतर अपनी एप्लीकेशनवापस ले सकता है।अथॉरिटी द्वारा दी गई एडवांसरूलिंग सिर्फ़ उसी एप्लीकेशन देनेवाले पर लागू होगीजिसने इसे मांगा था (ऊपर बताए गए किसीभी सवाल के संबंधमें), और साथ हीकस्टम्स या सेंट्रल एक्साइज़या सर्विस टैक्स कमिश्नर (जैसा भी मामलाहो) और उनके अधीनकाम करने वाले अधिकारियोंपर भी उस एप्लीकेशनदेने वाले के संबंधमें लागू होगी। कस्टम, सेंट्रल एक्साइज़ और सर्विस टैक्सकानूनों के तहत आवेदनकरने के लिए, कस्टम (एडवांस रूलिंग्स) नियम, 2002, सेंट्रल एक्साइज़ (एडवांस रूलिंग्स) नियम, 2002 और सर्विस टैक्स (एडवांस रूलिंग्स) नियम, 2003 के तहत फॉर्मतय किए गए हैं।संबंधित कानूनों के तहत मिलीशक्तियों के इस्तेमाल सेजुड़े सभी मामलों मेंअपनी प्रक्रिया को रेगुलेट करनेके लिए, 'एडवांस रूलिंग्स अथॉरिटी (कस्टम, सेंट्रल एक्साइज़ और सर्विस टैक्स) प्रक्रिया रेगुलेशन, 2005' (जिसे AARUL (CEST) रेगुलेशन भी कहा जाताहै) में विस्तृत प्रक्रियाबताई गई है।




